Monday, 11 March 2013

फैसला रब का तो ज़रूर होता है


मैं कैसा हूँ ?

मैं कैसा हूँ ?
जो वो कहते हैं सुन लेता हूँ
फिर उनको ही चुन लेता हूँ
वादों के धूमिल धागों से
मैं फिर सपने बुन लेता हूँ
मैं कैसा हूँ ?
जब चोट लगे रो लेता हूँ
मैं फर्शी पर सो लेता हूँ
हाँ, भूख लगी तो रोटी के
फिर सपने में खो लेता हूँ
मैं कैसा हूँ ?
सब कहते हैं मैं ज़िंदा हूँ
लेकिन खुद की ही निंदा हूं
साजिश से जिसके काट लिए
मैं, वो पर- कटा परिंदा हूँ
मैं कैसा हूँ ?
वादों के धूमिल धागों से
मैं फिर सपने बुन लेता हूँ
मैं कैसा हूँ ?
                गिरिराज भंडारी




Sunday, 10 March 2013

मातृ - भाषा हिन्दी बहुत उदास है


मातृ - भाषा  हिन्दी बहुत  उदास है
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आयातित हर चीज़ यहाँ पर ख़ास है
अंगरेजी  बोले उसको  मधुमास है
घर की भाषा भिखमंगी सी दिखी यहाँ
मातृ - भाषा  हिन्दी बहुत  उदास है
                         गिरिराज भंडारी 

Saturday, 9 March 2013




हर तरफ फैला ज़हर है, आज शंकर कौन होगा
अब सभी बन जाओ भोले,तब ही विषधर मौन होगा
                    हर हर महादेव -शुभ शिवरात्री
                                         गिरिराज भंडारी    

Wednesday, 6 March 2013

काबर रिसाये रे सरकार हमर ले

काबर  रिसाये  रे  सरकार  हमर  ले ( छत्तीसगढ़ी भाषा में  )
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काबर रिसाये रे सरकार हमर ले
देवथस दुनिया ल,अउ लेवथस हमर ले

पीरा कर थे जांघ, हाथ पाँव टुट गे
लकवा ह मार दिस मुड़ी से कमर ले

कमाइ पुरै नइ, महंगइ बाढ़ गे
सकबे त सकले, नई तो पसर ले

सब्बो मन  भ्रष्ट, चारों मुड़ा बइमान
मनखे ले जनावर, तहूँ ह गिर ले

उधारी बाढ़ी होगे हे,लुकावत फिरत हों
बजार हाट रेंगथों, मैं तीरे-तीर  ले

                          गिरिराज भंडारी

   


 

Friday, 1 March 2013

कुछ आधुनिक दोहे

      
          कुछ आधुनिक दोहे
व्यापारी  जितना बडा उसको उतना  छूट
आंख मूंद के मिडिल को चाहे जितना लूट

चाहे जितना लूट, कि   भूखा -नंगा  करदे
बचे –खुचे तो  महंगाई  को आगे   कर  दे

ऐसे  लूट  मचाईये, भारी  हो   हर   सांस
टैक्स ऐसा लग रहा,जूं गले फंसी हो फांस

गले फंसी हो फांस,दाना  पानी को  तरसे
आन्दोलन कर मांगे,तो फिर  डंडा   बरसे

धरम जाति के नाम पे, सौ -सौ दंगा होय  
जनता बम से फट मरा, जूं ना  रेंगा कोय
खून लाल हर आदम के, सब्बौ नेता एक रंग 
छोड़े ये जनता किसको,अरु किसको राखे संग                      
 
 
 गिरिराज भंडारी